1924 में बेलगाम अधिवेशन के दौरान महात्मा गांधी द्वारा रखे गए ‘स्वदेशी चिकित्सा सेवा’ के विचार को साकार करने के उद्देश्य से भारतीय अस्पताल संघ का पुनः गठन किया गया है। यह अधिवेशन गांधी जी की अध्यक्षता में 26 दिसंबर 1924 को आयोजित हुआ था, जो उनके जीवन का एकमात्र अधिवेशन था जिसमें वे अध्यक्ष बने।इतिहासकारों के अनुसार, उसी अधिवेशन की रात्रि में महात्मा गांधी और उनके बिहार-सम्बंधित कुछ सहयोगियों की तबीयत बिगड़ गई थी। अंग्रेजी शासन से उपचार हेतु की गई अपील को अनदेखा कर दिया गया था। इस असंवेदनशीलता से व्यथित होकर, गांधीजी एवं उनके साथियों ने 27 दिसंबर 1924 को भारतीय अस्पताल संघ की परिकल्पना की थी। हालांकि, समय के साथ संस्था निष्क्रिय हो गई थी।लेकिन अब, गांधी विचारों को पुनः जाग्रत करते हुए, कुछ युवा समाजसेवियों ने इस संगठन को 27 दिसंबर 2024 को पुनर्जीवित किया। नवगठित समिति में रणधीर कुमार सिंह को संस्थापक, नीरज कुमार को बोर्ड आफ डायरेक्टर एवं जयंत कुमार को संयोजक, विकास कुमार प्रवक्ता बनाया गया |
भारतीय अस्पताल संघ संस्थापक की दृष्टि मानवता सर्वोपरि संघ के संस्थापक श्री रणधीर कुमार सिंह का स्पष्ट संदेश है “अस्पताल केवल इलाज का स्थान नहीं, बल्कि मानवता का मंदिर है।” यही विचार “भारतीय अस्पताल संघ” की आत्मा है।
स्वस्थ भारत, सशक्त भारत — यही है भारतीय अस्पताल संघ का संकल्प।
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